आज के विचार
!! बृजरस यात्रा दर्शन- 2 !!
“केशव देव मन्दिर - श्रीकृष्णजन्म भूमि”
“बृज समुद्र मथुरा कमल , वृन्दावन मकरंद ,
बृज वनिता सब पुष्प हैं , मधुकर गोकुल चंद” ।
बोलो - श्रीकेशव देव भगवान की जय ....ये है श्रीकेशव देव जी का स्थान .....”केशवो न समो देवो” केशव देव जैसा कोई देवता नही है ..ये भूमि केशव देव की है ...यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र बज्रनाभ जी आए थे तो उन्होंने ही श्रीकेशव देव के विग्रह को कारागार में स्थापित किया ।
श्रीकृष्णजन्म भूमि । यहाँ “पोतरा कुण्ड” है.....पोतरा कुण्ड में श्रीबालकृष्ण के जन्म के वस्त्र धोए गये थे ....इसलिए इसको “पोतरा” नाम दिया है ।
केशव देव मन्दिर है ....- मूल तो केशव देव का मन्दिर मस्जिद के अन्दर ही है ....वैसे कारागार का आधा भाग मस्जिद के भीतर है ।
यवनों ने इस श्रीकृष्णजन्म भूमि को कई बार तोड़ा ...और हिन्दू सनातनियों ने मिल कर फिर बनाया ...
ये कारागार है .....यहीं भगवान श्रीकृष्ण रात्रि में प्रकटे ...देवकी के गर्भ से .....वसुदेव जी ने स्तुति करी तो श्रीकृष्ण ने कहा .....मुझे गोकुल ले जाइये पिता जी ! लेकिन हाथों में हथकड़ियाँ , पैरों में बेड़ियाँ , दरवाज़े पर ताले फिर बाहर सैनिकों का कड़ा पहरा ...... श्रीकृष्ण मुस्कुराए और उनके मुस्कुराते ही ताले टूट गए ....सैनिक सो गये ...और इसी दरवाज़े से वसुदेव जी श्रीकृष्ण को लेकर गोकुल की ओर चले गए
“भागवत भवन”
ये बिड़ला जी श्रीपोद्दार हनुमान प्रसाद जी आदि के प्रयास से निर्मित है । आप दर्शन कीजिए ।
बहुत सुन्दर है श्रीकृष्णजन्मभूमि का “भागवत भवन” ।
ताम्रपत्र में सम्पूर्ण भागवत को उकेरा गया है .....देखते ही मन प्रसन्न हो उठता है । श्रीराधाकृष्ण का दिव्य भव्य विग्रह है ....विग्रह इतना सुन्दर है कि....लगता है बस देखते रहो ये कन्हैया की भूमि है ...यहाँ पर तो हंसों......
आगे कल -